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आगरा. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में बनने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय को आगरा स्थित स्व-वित्तपोषित डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के आपातकालीन निधि से वित्त पोषित किया जाएगा. इसके अलावा आगरा विश्वविद्यालय से करीब 400 कॉलेजों को हटाकर इस नए विश्वविद्यालय में शामिल कर दिया जाएगा, जिससे आगरा विश्वविद्यालय को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जाट मतदाताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए योगी सरकार अलीगढ़ अलीगढ़ में जाट नेता राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से नया राज्य विश्वविद्यालय खोल रही है, जिसका मंगलवार यानी 14 सितंबर 2021 की दोपहर करीब तीन बजे पीएम मोदी ने उद्घाटन कर दिया. इस दौरान यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, सीएम योगी आदित्यानाथ और डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे. ये राजा महेंद्र प्रताप सिंह वही जाट नेता हैं, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी होने के बाद भी भाजपा के दिग्गज व पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से 1957 के लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त दी थी. योगी सरकार के फैसले पर आगरा विश्वविद्यालय के कर्मचारी खुलकर तो कुछ बोल नहीं पा रहे लेकिन दबी जुबान में विरोध कर रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि इस स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालय के धन को एक प्रतिस्पर्धी राज्य विश्वविद्यालय बनाने के लिए लेना न केवल अन्यायपूर्ण बल्कि अत्यधिक अनियमित है, क्योंकि राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय को राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाना चाहिए था, न कि आगरा विश्वविद्यालय के आपातकालीन बजट से. जबकि एक मौजूदा स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालय जिसे राज्य के वित्त पोषण के रूप में कुछ भी नहीं मिलता है.

आगरा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय को नए राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के सभी खर्चों को वित्तपोषित करने के लिए मजबूर कर रही है, जिसके गठन से अंबेडकर विश्वविद्यालय केवल गरीब हो जाएगा. साथ ही अपने अधिकार क्षेत्र से करीब 400 कॉलेज भी खो देगा.
आगरा के वित्त अधिकारी एके सिंह, जो नवगठित राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के वित्त अधिकारी भी हैं, ने पुष्टि की कि राज्य सरकार के आदेश पर नए राज्य विश्वविद्यालय के गठन के लिए आगरा विश्वविद्यालय के खातों से 100 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं.